रायपुर कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ आम जनता तक पहुंचे, इसके लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलाने के उद्देश्य से रायपुर कलेक्टर ने अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यह योजना आम जनता के जीवन में ऊर्जा आत्मनिर्भरता लाने का एक बड़ा कदम है, इसलिए जिले के हर पात्र नागरिक तक इसका लाभ पहुंचना चाहिए।
कलेक्टर ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह योजना गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि आज जब बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोत ही स्थायी समाधान बन सकते हैं।
बैठक में जिला प्रशासन, बिजली विभाग, और नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के अधिकारी मौजूद थे। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्यघर योजना के तहत हर घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर नागरिक अपने घर की बिजली जरूरत खुद पूरी कर सकते हैं, और अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी कमा सकते हैं।
कलेक्टर ने बताया कि योजना के तहत सरकार द्वारा 40% से 60% तक की सब्सिडी दी जा रही है। इससे आम परिवारों के लिए सोलर सिस्टम लगाना अब आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि अधिक से अधिक परिवार आवेदन करें और योजना के लाभ से वंचित न रहें।
बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके लिए ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय सामाजिक संगठनों की मदद ली जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि जिन घरों में पहले से बिजली बिल अधिक आता है, उन्हें सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां धूप प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, वहां सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कलेक्टर ने बिजली विभाग को निर्देश दिया कि योजना के लाभार्थियों के आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाए। ऑनलाइन पोर्टल पर समय पर आवेदन स्वीकार किए जाएं और स्वीकृति में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के आवेदन लंबित हैं, उनकी सूची तैयार कर शीघ्र समाधान किया जाए।
कलेक्टर ने बैठक में कहा कि जिले के प्रत्येक ब्लॉक में सोलर सहायक केंद्र स्थापित किए जाएं, जहां आमजन को जानकारी, आवेदन सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन मिल सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सोलर पैनल लगाने वाली एजेंसियां निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करें।
उन्होंने यह भी बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल बिजली बिलों में कमी आएगी, बल्कि नागरिकों को अतिरिक्त आमदनी का भी अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर घर “ऊर्जा आत्मनिर्भर” बने और देश “ग्रीन एनर्जी” की दिशा में अग्रसर हो।
बैठक के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि अब तक जिले में सैकड़ों परिवारों ने इस योजना के लिए आवेदन किया है और कई घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इससे संबंधित आंकड़े नियमित रूप से राज्य सरकार को भेजे जा रहे हैं।
कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि योजना के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया, स्थानीय अखबारों और रेडियो का उपयोग किया जाए, ताकि हर नागरिक को इसकी जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि “हर घर में सूरज की रोशनी से उजाला लाना” इस योजना का मुख्य उद्देश्य है।
कलेक्टर ने अंत में कहा कि यदि हर नागरिक इस योजना में सक्रिय भागीदारी करेगा, तो आने वाले समय में रायपुर जिला न केवल सौर ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी बनेगा बल्कि “ग्रीन सिटी” के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करेगा।
उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करें और बिजली बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।
निष्कर्षतः, रायपुर प्रशासन की यह पहल प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। इससे जिले के नागरिकों को आर्थिक राहत, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन — तीनों का लाभ एक साथ मिलेगा।
