बस्तर के मांदर गांव में पहाड़ी नाले की बाढ़ से घरों को भारी नुकसान, प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने का निर्णय लिया।
जगदलपुर। बस्तर जिले के मांदर गांव में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने ग्रामीणों की जिंदगी को तहस-नहस कर दिया। पहाड़ी नाले के उफान में आ जाने से दर्जनों घरों को भारी नुकसान हुआ, कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए और ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि अचानक आई बाढ़ ने उन्हें सोते हुए भी जगाया और घरों में रखा अनाज, फर्नीचर, पशु और घरेलू सामान बह कर नाले में समा गया।
ग्रामीणों की परेशानियां
मांदर गांव के निवासी रमेश नाग ने बताया, “रात में तेज बारिश और नाले के उफान से हमारा घर बहने की कगार पर था। हमने जान बचाने के लिए परिवार सहित घर छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर भागा।” वहीं, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत राहत सामग्री और अस्थायी आवास की मांग की है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जगदलपुर कलेक्टर ने घटनास्थल का दौरा कर बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पहाड़ी नाले के किनारे बसे घरों की स्थिति चिंताजनक है। सुरक्षा और भविष्य की आपदा से बचाव के लिए प्रशासन ने प्रभावित ग्रामीणों को अस्थायी स्थानों पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर ने कहा, “हमने आवश्यक राहत सामग्री जैसे भोजन, पानी, दवाइयां और अस्थायी शरण स्थल की व्यवस्था कर दी है। सुरक्षित स्थानों पर पलायन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।”
भारी नुकसान और राहत प्रयास
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, पहाड़ी नाले के किनारे करीब 50 से अधिक घरों को नुकसान हुआ है। इनमें से कुछ घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं और कई मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। प्रशासन ने स्थानीय स्वयंसेवकों और पुलिस के सहयोग से राहत कार्यों को शुरू कर दिया है। राहत शिविरों में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है।
आगे की योजना
भारी बारिश और नाले के उफान को देखते हुए प्रशासन ने अगले कुछ दिनों तक इलाके में सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि गांवों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास के बाद प्रभावित परिवारों के घरों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने अतिरिक्त फंड जारी किया है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने प्रशासन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। वहीं कुछ ग्रामीण इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अस्थायी शरणस्थलों में सुविधाओं की कमी हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
भूस्खलन और बाढ़ विशेषज्ञों का कहना है कि बस्तर जैसी पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे नालों का उफान अचानक खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने प्रशासन से सतर्क रहने और लंबे समय तक बाढ़ संभावित क्षेत्रों में स्थायी पुनर्वास योजना तैयार करने का सुझाव दिया।
निष्कर्ष
मांदर गांव की घटना यह याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और समय पर राहत कार्य अत्यंत आवश्यक हैं। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा प्राथमिकता बन रही है।





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