बैंक ऑफ बड़ौदा ने अनिल अंबानी की RCOM को फ्रॉड घोषित किया, ₹1,656 करोड़ बकाया, वित्तीय स्थिति और अधिक गंभीर, निवेशकों व बैंकों में चिंता।
रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के बाद अब बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी उन्हें फ्रॉड घोषित कर दिया है। बैंक के मुताबिक, अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) पर ₹1,656 करोड़ से अधिक की बकाया राशि है।
इस फैसले की जानकारी बैंक ने कंपनी को 2 सितंबर 2025 को एक आधिकारिक पत्र के जरिए दी। बैंक ने यह निर्णय ब्याज, मूलधन और अन्य देयताओं के लंबित रहने के कारण लिया है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि कंपनी लगातार बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रही थी, जिससे बैंक को इस गंभीर कदम की आवश्यकता पड़ी।
अनिल अंबानी और RCOM की स्थिति:
RCOM पिछले कई वर्षों से वित्तीय संकट और कर्ज बोझ के कारण मुश्किलों में है। कंपनी पर कई बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का कर्ज लंबित है। पिछले कुछ समय में अनिल अंबानी की कंपनियों पर कई कानूनी और वित्तीय जांचें भी चल रही हैं।
साथ ही, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया ने भी पहले ही RCOM को डेफॉल्टर और फ्रॉड मानने के नोटिस जारी कर चुके हैं। अब बैंक ऑफ बड़ौदा के फैसले के बाद अनिल अंबानी की वित्तीय स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
बैंक के फ्रॉड नोटिस का प्रभाव:
बैंक ऑफ बड़ौदा के इस नोटिस से RCOM और अनिल अंबानी की कंपनियों पर ऋण पुनर्भुगतान, निवेश और शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से अन्य बैंक और वित्तीय संस्थान भी कर्ज वसूलने के लिए सख्त कदम उठा सकते हैं।
वित्तीय विश्लेषक आर. के. शर्मा का कहना है, “अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है। बकाया राशि की अदायगी न होने पर बैंक कानूनी कार्रवाई के तहत संपत्तियों की नीलामी भी कर सकते हैं।”
RCOM के लिए भविष्य:
RCOM के पास आने वाले महीनों में अपने वित्तीय कर्ज और देनदारियों का समाधान करना चुनौतीपूर्ण होगा। कंपनी को बैंक के साथ सुलह या पुनर्वित्त के विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा, अन्यथा कानूनी कार्रवाई तेज़ हो सकती है।
अनिल अंबानी की वित्तीय परेशानियां सिर्फ RCOM तक ही सीमित नहीं हैं। रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों पर भी कर्ज और बकाया भुगतान का दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनिल अंबानी की कंपनियों को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए सख्त कदम और पुनर्गठन योजना अपनानी होगी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के इस फैसले को वित्तीय जगत में बड़े स्तर पर देखा जा रहा है। इससे न केवल अनिल अंबानी बल्कि भारत की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के ऋण प्रबंधन और बैंकिंग प्रणाली पर भी असर पड़ेगा।
RCOM और अनिल अंबानी की कंपनियों पर अब निवेशकों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं की नज़रें टिकी हुई हैं। आगामी महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अनिल अंबानी कर्ज का भुगतान या सुलह कर पाते हैं, या कंपनी की वित्तीय स्थिति और गहराती जाएगी।
