छत्तीसगढ़ में मोतियाबिंद ऑपरेशन में घटिया लेंस लगाने का मामला उजागर, मरीजों की शिकायत पीएमओ तक पहुँची। जांच की मांग और स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश के कई जिलों में संचालित मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान मरीजों को घटिया लेंस लगाए जाने की शिकायत सामने आई है। यह मामला इतना गंभीर हो गया कि इसकी शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुँच गई है। इससे प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग कठघरे में खड़ा हो गया है।
मरीजों और परिजनों का आरोप
मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि ऑपरेशन के दौरान लगाए गए लेंस की गुणवत्ता बेहद खराब है। इससे न केवल कई मरीजों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है बल्कि कुछ मामलों में संक्रमण की समस्या भी देखी गई है। कई ग्रामीण क्षेत्रों से यह शिकायतें लगातार सामने आई हैं कि सरकारी अस्पतालों और कैम्पों में सस्ते और घटिया लेंस का इस्तेमाल हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने तीखा हमला बोला है। सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार मरीजों के लिए करोड़ों रुपए का बजट खर्च करती है तो फिर घटिया क्वालिटी का सामान खरीदने की अनुमति कैसे दी जाती है? क्या इसमें भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी शामिल है?
पीएमओ से हस्तक्षेप की मांग
शिकायतकर्ताओं ने पीएमओ से मांग की है कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि अगर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो गरीब मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ जारी रहेगा।
प्रदेश सरकार की सफाई
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने हालांकि दावा किया है कि इस मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि जहां भी गड़बड़ी पाई जाएगी वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि दोषी सप्लायर और संबंधित चिकित्सक किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। नेत्रहीनता निवारण कार्यक्रम जैसे संवेदनशील अभियान को भी लापरवाही और भ्रष्टाचार ने प्रभावित कर दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले लेंस की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। अगर घटिया लेंस का प्रयोग किया गया तो इससे न केवल दृष्टि प्रभावित होगी बल्कि आंखों की स्थायी क्षति का खतरा भी बढ़ जाएगा। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सरकार को तत्काल उच्च स्तरीय तकनीकी समिति गठित करनी चाहिए और हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
जन आक्रोश
इस खबर के सामने आने के बाद मरीजों और परिजनों में आक्रोश फैल गया है। कई जिलों में स्वास्थ्य शिविरों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे गरीब होने के कारण सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं। लेकिन अगर वही योजनाएं उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाएं, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
आने वाले दिनों में सख्त कार्रवाई संभव
इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष के तीखे हमलों और जन आक्रोश को देखते हुए सरकार आने वाले दिनों में कड़ी कार्रवाई कर सकती है। पीएमओ से शिकायत पहुँचने के बाद केंद्र की ओर से भी इस मामले पर नज़र रखी जा रही है।





अपनी प्रतिक्रिया दें