सोमवार, 14 सितंबर 2026
ताज़ा खबर
Advertisement

श्री वासुदेव गौशाला में एक दिन 25 गायें मृत

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 28 August 2025

छत्तीसगढ़ की श्री वासुदेव गौशाला में 25 से ज्यादा गायों की मौत। ग्रामीणों ने भूख बताया कारण, जबकि प्रबंधन ने बीमारी का हवाला दिया, प्रशासन जांच में जुटा।

बिलासपुर। मस्तूरी ब्लॉक के ओखर गांव स्थित श्री वासुदेव गौशाला  एक ही दिन में 25 से ज्यादा गायों की मौत से इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गायों को समय पर चारा और पानी नहीं दिया गया, जिसके चलते उनकी मौत भूख-प्यास से हुई है। वहीं गौशाला प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गायें लंबे समय से बीमारी से पीड़ित थीं और इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

Read it loud

ग्रामीणों के आरोप: भूख और लापरवाही बनी मौत की वजह

स्थानीय ग्रामीणों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गौशाला में रखी गई गायों को पिछले कई दिनों से पर्याप्त चारा-पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था। उनका कहना है कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में गायों की जान गई। कुछ ग्रामीणों ने यहां तक आरोप लगाया कि गौशाला की देखरेख में भारी अनियमितताएं हो रही हैं और दान में आए अनाज व चारा का सही उपयोग नहीं किया जा रहा।


प्रबंधन की दलील: बीमारी से हुई मौत

गौशाला के मैनेजर ने ग्रामीणों के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि मौत का कारण भूख नहीं बल्कि बीमारी है। उन्होंने बताया कि कुछ गायें पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थीं। स्थानीय पशु चिकित्सकों को बुलाकर उनका इलाज भी कराया गया, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।


प्रशासन की सक्रियता: जांच के आदेश

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। स्थानीय एसडीएम ने गौशाला का दौरा किया और मृत गायों की स्थिति की जांच की। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यह देखा जाएगा कि मौतें वाकई बीमारी से हुई हैं या लापरवाही से। अगर जांच में लापरवाही साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


राजनीतिक और सामाजिक हलचल

इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत से स्थानीय राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में भी आक्रोश है। विपक्षी नेताओं ने इस घटना को सरकार की लापरवाही बताते हुए राज्य में गौशालाओं की वास्तविक स्थिति उजागर करने की मांग की। वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने कहा कि गौशाला के नाम पर करोड़ों रुपये का दान आता है, लेकिन जमीन पर उसका उपयोग पारदर्शी तरीके से नहीं किया जाता।


ग्रामीणों की भावनात्मक प्रतिक्रिया

गांव के लोगों ने कहा कि गाय उनके लिए सिर्फ एक पशु नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक हैं। उन्होंने मांग की कि दोषियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन और प्रबंधन समय रहते सचेत रहते तो इतनी बड़ी संख्या में गायों की जान नहीं जाती।


पशु चिकित्सकों की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

घटना के बाद पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मृत गायों का पोस्टमार्टम शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह सामने आएगी। फिलहाल विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कुछ गायें संक्रमण और कमजोरी से पीड़ित मिलीं।


निष्कर्ष नहीं — सवाल बाकी

श्री वासुदेव गौशाला में हुई इस दर्दनाक घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या गायों की मौत बीमारी से हुई या यह वास्तव में भूख-प्यास और लापरवाही का परिणाम है? जवाब आने वाली जांच रिपोर्ट से ही मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने गौशाला प्रबंधन की व्यवस्था और सरकारी निगरानी दोनों पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।


संबंधित खबरें

अपनी प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *