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बेटी ने निभाई पिता की अंतिम संस्कार जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 25 August 2025


बेटी ने निभाई पिता की अंतिम इच्छा, पिंडदान और मुंडन की रस्म पूरी की, मिसाल कायम की, समाज में बेटियों की भूमिका उजागर हुई

सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के एक छोटे गाँव में बेटी ने अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी कर मिसाल कायम की। परंपराओं में आमतौर पर बेटे को पिता की अंतिम संस्कार और पिंडदान की रस्में निभाने की जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन इस बार बेटी ने यह कर्तव्य अपने हाथ में लिया और समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।

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जानकारी के अनुसार, गांव निवासी स्व. रामनाथ साहू के निधन के बाद उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनके पिंडदान और मुंडन की रस्म उनके परिवार द्वारा विधिवत रूप से संपन्न की जाए। बेटा ना होने के कारण उनकी बड़ी बेटी, पूजा साहू, ने यह जिम्मेदारी उठाई। पूजा ने न केवल पिंडदान की रस्म पूरी की, बल्कि अपने छोटे भाई के मुंडन की भी व्यवस्था सुनिश्चित की।

पूजा ने परिवार और ग्रामीणों के बीच यह स्पष्ट किया कि यह कार्य सिर्फ परंपरा का पालन नहीं, बल्कि पिता के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने हमेशा हमें समान अधिकार और जिम्मेदारी सिखाई। मैंने सोचा कि क्यों न उनके अंतिम संस्कार और पिंडदान की रस्म पूरी कर उनकी इच्छा पूरी की जाए।”

गांव के लोग पूजा के इस कदम से प्रभावित हुए और उनके साहस और समर्पण की सराहना की। सरपंच और स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि यह एक मिसाल है कि बेटियों की भूमिका भी पारंपरिक सीमाओं से परे समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस अवसर पर पंडित द्वारा विधि-विधान अनुसार पूजा की और पिंडदान सम्पन्न हुआ। इसके बाद छोटे भाई का मुंडन भी बड़े विधिवत तरीके से किया गया। इस पूरे कार्यक्रम में परिवार के सदस्य और ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने बेटी के साहसिक निर्णय की सराहना की।

पूजा की इस पहल ने यह संदेश दिया कि सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों में बेटियों की भागीदारी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी बेटों की। यह घटना न केवल परिवार में बल्कि समाज के लिए भी प्रेरक बनी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देती हैं और बेटियों के प्रति सोच में बदलाव लाती हैं। पूजा की यह मिसाल यह साबित करती है कि परंपराओं को निभाने में बेटियों की भूमिका भी उतनी ही प्रभावशाली और सम्मानजनक हो सकती है।

इस प्रकार, बेटी ने न केवल अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी की बल्कि समाज में एक नई दिशा और सोच प्रस्तुत की। उनकी यह कहानी प्रेरणा का स्रोत बन गई है और अन्य परिवारों को भी यह संदेश देती है कि बेटियों की जिम्मेदारी और योगदान परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


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