गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
ताज़ा खबर
Advertisement

डीजे बजाने पर लगेगी 5 लाख की पेनाल्टी, हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 19 August 2025

त्योहारों पर कानफोड़ू डीजे पर लगेगी रोक। हाईकोर्ट ने सरकार को 3 हफ्तों में कोलाहल नियंत्रण अधिनियम लागू करने का आदेश दिया, नियम तोड़ने पर 5 लाख जुर्माना।

बिलासपुर. हाईकोर्ट त्योहारों के दौरान तेज आवाज में बजने वाले डीजे और कानफोड़ू साउंड सिस्टम अब लोगों के लिए परेशानी का सबब नहीं बनेंगे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य सरकार को तीन हफ्तों के भीतर कोलाहल नियंत्रण अधिनियम (Noise Pollution Control Act) को लागू करना होगा। आदेश का पालन न होने पर सरकार को जवाब देना पड़ेगा।

Read it loud

त्योहारों पर डीजे का शोर बना समस्या

हर साल दशहरा, दिवाली, गणेशोत्सव और अन्य पर्व-त्योहारों के मौके पर शहरों और कस्बों में डीजे के शोर से लोग परेशान रहते हैं। रात देर तक बजने वाले इन डीजों के कारण बच्चे, बुजुर्ग और मरीज नींद नहीं ले पाते। कई बार हादसे भी होते हैं।

हाईकोर्ट का रुख

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अब और देरी नहीं चलेगी। अदालत ने सरकार को साफ निर्देश दिए हैं कि तीन हफ्तों के भीतर अधिनियम को लागू करें। इसके तहत नियम तोड़ने पर 5 लाख रुपये तक की पेनाल्टी लगाई जा सकेगी।

क्या है कोलाहल नियंत्रण अधिनियम?

यह अधिनियम विशेष रूप से ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इसमें यह प्रावधान है कि

  • निर्धारित समय सीमा (आमतौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक) में डीजे और लाउडस्पीकर नहीं बजेंगे।
  • धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में भी ध्वनि सीमा का पालन अनिवार्य होगा।
  • नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

5 लाख की पेनाल्टी क्यों?

अधिनियम में जुर्माने की राशि इतनी अधिक इसलिए रखी गई है ताकि लोग नियम तोड़ने से पहले सौ बार सोचें। अब छोटे-मोटे दंड से बचने का रास्ता नहीं बचेगा।

आम जनता की प्रतिक्रिया

  • मरीज और बुजुर्ग : वे इसे राहत भरा कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि त्योहारों पर आराम और नींद छिन जाती है।
  • युवा वर्ग : कुछ युवाओं ने कहा कि डीजे त्योहारों की रौनक हैं, लेकिन कानफोड़ू शोर की जगह नियंत्रित साउंड सिस्टम होना चाहिए।
  • पंडाल आयोजक : कई आयोजकों को चिंता है कि नियमों से त्योहार की चमक फीकी पड़ जाएगी। हालांकि ज्यादातर सहमत हैं कि कानूनी सीमाओं के भीतर रहना जरूरी है।

सरकार की तैयारी

राज्य सरकार ने कहा है कि अधिनियम को लागू करने के लिए सभी जिलों के प्रशासन को निर्देश भेजे जाएंगे। साथ ही पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी।

अन्य राज्यों का अनुभव

महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से ही इस तरह के नियम लागू हैं। वहां पर भी डीजे बजाने पर जुर्माना लगाया जाता है। छत्तीसगढ़ में इस अधिनियम को लागू करने से ध्वनि प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण केवल कानों को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि इससे हृदय रोग, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए सख्ती जरूरी है।

आगे की राह

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार पर दबाव है कि वह तय समयसीमा में अधिनियम को लागू करे। यदि सरकार चूक करती है तो अदालत कड़ा रुख अपना सकती है।


संबंधित खबरें

अपनी प्रतिक्रिया दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मुफ़्त जन्म कुंडली — MahaJyotish