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शहरी विकास विभाग टेंडर में गड़बड़ी, अफसरों विवाद

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 16 August 2025

शहरी विकास विभाग के सिलाई मशीन टेंडर में गड़बड़ी, अफसरों पर चहेतों के लिए टेंडर निकालने का आरोप, जांच जारी, पारदर्शिता पर सवाल।

रायपुर। शहरी विकास विभाग में हाल ही में जारी सिलाई मशीन टेंडर में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। विभागीय अफसरों पर चहेतों के लिए टेंडर निकालने और टेंडर में मशीनों की स्पष्ट जानकारी न देने का आरोप लगाया गया है। इस मामले ने विभागीय पारदर्शिता और टेंडर प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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सूत्रों के अनुसार, टेंडर में यह नहीं लिखा गया कि किस प्रकार की सिलाई मशीन की आवश्यकता है। इससे अस्पष्टता बनी रही और विभागीय अधिकारियों के पक्षपाती रवैये की संभावनाओं को बल मिला। कई विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की गड़बड़ियां टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित करती हैं और सरकारी संसाधनों का उचित उपयोग नहीं हो पाता।

इस मामले को लेकर विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि अगर टेंडर में आवश्यक मशीनों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई तो यह न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है बल्कि विभाग की विश्वसनीयता पर भी असर डालता है।

अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के अनुसार की गई है और किसी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया। हालांकि, विभागीय दस्तावेजों और टेंडर में विवरणों की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भविष्य में टेंडर जारी करने से पहले स्पष्ट तकनीकी स्पेसिफिकेशन और आवश्यकताओं का उल्लेख किया जाना चाहिए। साथ ही, स्वतंत्र निगरानी समिति द्वारा टेंडर प्रक्रिया की समीक्षा भी की जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

इस मामले की जांच अभी जारी है और विभाग ने आश्वासन दिया है कि अगर किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शहरी विकास विभाग की यह टेंडर गड़बड़ी यह दर्शाती है कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता बनाए रखना कितना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सही और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया न होने से केवल भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ती हैं बल्कि विभागीय कामकाज की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ता है।

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सिलाई मशीन टेंडर से जुड़े उपकरण और मशीनें विभिन्न सरकारी परियोजनाओं में महिलाओं और युवाओं के कौशल विकास के लिए उपयोग की जाती हैं। इसलिए, इस तरह की गड़बड़ी से प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रमों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

वहीं, समाजिक संगठन और स्थानीय मीडिया लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं और वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द जांच पूरी हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।


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