पर्यावरण पार्क के मजदूरों को महीनों से मजदूरी नहीं मिली। मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल भुगतान और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
रायपुर। राजधानी रायपुर के पर्यावरण पार्क में काम करने वाले मजदूरों की कई महीनों से लंबित मजदूरी को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मजदूरों ने शिकायत की थी कि लगातार मेहनत करने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और मजदूरों का भुगतान तत्काल करने के निर्देश दिए।
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मजदूरों की व्यथा : महीनों से खाली जेब
मजदूरों ने बताया कि पार्क में सफाई, रखरखाव और निर्माण कार्य लगातार करने के बावजूद वेतन का भुगतान कई महीनों से नहीं हुआ। स्थिति यह हो गई है कि परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। मजदूरों ने स्थानीय स्तर पर शिकायत की थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद मामला मंत्री तक पहुंचा।
मंत्री का हस्तक्षेप : अधिकारियों को लगाई फटकार
मंत्री केदार कश्यप ने इस लापरवाही को गंभीरता से लिया और जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि मजदूरों का मेहनताना रोकना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि मानवाधिकार का भी उल्लंघन है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मजदूरों का बकाया वेतन तत्काल जारी किया जाए और भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।
मजदूरों में खुशी की लहर
मंत्री के आदेश के बाद मजदूरों ने राहत की सांस ली। उनका कहना है कि समय पर मजदूरी मिलने से परिवार का जीवन सुचारू रूप से चल सकेगा। मजदूरों ने मंत्री के हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा नहीं आएगी।
सिस्टम पर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। जब पर्यावरण पार्क जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में मजदूरों को महीनों तक मजदूरी नहीं मिल रही, तो सवाल उठना लाजमी है कि निगरानी और जवाबदेही कहां है? इस घटना ने मजदूरों के हक और अधिकारों पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
भविष्य की दिशा
मंत्री ने स्पष्ट किया है कि मजदूरों को समय पर वेतन सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके साथ ही, लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।





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