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बस्तर के 29 गांवों में पहली बार तिरंगा

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 14 August 2025

बस्तर के 29 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा, जहां पहले नक्सली प्रभाव के कारण काले झंडे लगाए जाते थे।


जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस का जश्न इस बार एक नया इतिहास रचने जा रहा है। दशकों से नक्सल प्रभाव में रहे 29 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। जहां पहले सरकारी कार्यक्रमों के बहिष्कार के तौर पर काले झंडे लगाए जाते थे, अब वहां राष्ट्रीय ध्वज लहराएगा और देशभक्ति गीत गूंजेंगे।

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नक्सल प्रभाव से आज़ादी की ओर कदम

बस्तर के ये गांव लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के प्रभाव में थे। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर यहां काले झंडे लगाकर विरोध दर्ज किया जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों और प्रशासन के प्रयासों से इन क्षेत्रों में शांति और विकास का माहौल बना है।


लोगों में उत्साह का माहौल

गांवों के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अब खुले दिल से देशभक्ति के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने को तैयार हैं। प्रशासन की पहल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत और तिरंगा यात्रा का आयोजन होगा।


सरकार की पहल और सुरक्षा व्यवस्था

जिला प्रशासन ने इन 29 गांवों में स्वतंत्रता दिवस समारोह को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारी की है। सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती, स्कूलों में बच्चों को तिरंगा बांटना और गांव-गांव में देशभक्ति रैलियां निकाली जा रही हैं।


स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका

जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को राष्ट्रीय पर्व के महत्व के बारे में समझा रहे हैं। उनका कहना है कि तिरंगा केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, गर्व और एकता का प्रतीक है।


पहली बार बदलते दृश्य

इन गांवों में यह पहला अवसर होगा जब स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने के साथ-साथ सामूहिक राष्ट्रगान गाया जाएगा। गांव की गलियों को तिरंगे के रंगों से सजाया जा रहा है, बच्चों के हाथों में छोटे-छोटे झंडे दिए जा रहे हैं और महिलाओं के समूह सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत करेंगे।


नागरिकों की प्रतिक्रिया

गांव के एक बुजुर्ग ने कहा, “पहले हमें डर लगता था कि कोई राष्ट्रीय पर्व मनाने पर नक्सली सजा देंगे, लेकिन अब हमें गर्व है कि हम तिरंगा फहराएंगे।”


प्रशासन की उम्मीदें

प्रशासन का मानना है कि यह पहल इन गांवों में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रीय एकता और गर्व की सीख देगा।


निष्कर्ष

बस्तर के इन 29 गांवों में तिरंगा फहराने की यह ऐतिहासिक पहल साबित करेगी कि बदलाव संभव है। यह केवल राष्ट्रीय पर्व का जश्न नहीं, बल्कि दशकों से डर और अलगाव के साए में जी रहे लोगों के लिए नई शुरुआत है।


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