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छत्तीसगढ़ में बाल विवाह मुक्त गांवों को मिलेगा प्रमाणपत्र

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 13 August 2025

छत्तीसगढ़ में बाल विवाह रोकथाम की नई पहल, दो साल तक शून्य मामलों वाले गांव-शहर को मिलेगा सम्मान प्रमाणपत्र, सरकार ने निगरानी और जागरूकता अभियान शुरू किए।

रायपुर, 12 अगस्त 2025 – छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में बाल विवाह रोकथाम के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, वर्तमान में हर 100 विवाह में से लगभग 12 मामले बाल विवाह के सामने आ रहे हैं। इस गंभीर सामाजिक समस्या पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि जिन गांवों और शहरी वार्डों में लगातार दो वर्षों तक एक भी बाल विवाह का मामला दर्ज नहीं होगा, उन्हें “बाल विवाह मुक्त प्रमाणपत्र” प्रदान किया जाएगा।

योजना का उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य न केवल बाल विवाह की घटनाओं को कम करना है, बल्कि समाज में बाल विवाह को लेकर जागरूकता बढ़ाना और इसे सामाजिक रूप से अस्वीकार्य बनाना भी है। सरकार का मानना है कि जब स्थानीय समुदाय खुद जागरूक होंगे, तब यह कुप्रथा स्वतः खत्म हो जाएगी।

आंकड़ों से स्थिति की गंभीरता

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष राज्य में दर्ज विवाहों में से लगभग 12 प्रतिशत मामले बाल विवाह के थे। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या अधिक है, जबकि शहरी इलाकों में भी चिंताजनक स्तर पर मामले सामने आते हैं।

योजना की कार्यप्रणाली

  • प्रत्येक गांव और शहरी वार्ड में बाल विवाह की निगरानी के लिए एक स्थानीय समिति बनाई जाएगी।
  • समिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सदस्य, महिला स्व-सहायता समूह और स्थानीय पुलिस प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  • दो वर्षों तक किसी भी प्रकार का बाल विवाह दर्ज न होने पर, उस क्षेत्र को “बाल विवाह मुक्त” घोषित किया जाएगा।
  • प्रमाणपत्र के साथ-साथ समाज में सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित होगा, ताकि समुदाय को प्रेरणा मिल सके।

समाज की भूमिका

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि इस योजना की सफलता में समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। माता-पिता, रिश्तेदार और स्थानीय नेतृत्व को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों और 21 वर्ष से कम आयु के लड़कों की शादी न हो।

कानून का कड़ा पालन

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत, बाल विवाह कराना या उसमें शामिल होना दंडनीय अपराध है। दोषियों को कड़ी सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी मामले में समझौता नहीं होगा।

जागरूकता अभियान

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें नुक्कड़ नाटक, पोस्टर, सोशल मीडिया अभियान और छात्र-छात्राओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

विशेषज्ञों की राय

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की मानसिकता बदलना भी आवश्यक है। आर्थिक स्थिति, शिक्षा की कमी और सामाजिक दबाव बाल विवाह के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में जागरूकता के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाना भी जरूरी है।

संभावित प्रभाव

यदि यह योजना सफल होती है, तो न केवल बाल विवाह की घटनाएं कम होंगी, बल्कि राज्य में शिक्षा दर बढ़ेगी, किशोरियों का स्वास्थ्य बेहतर होगा और समाज में लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।


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