छत्तीसगढ़ सरकार स्कूलों की विद्युत सुरक्षा जांच करेगी। हालिया करंट हादसे के बाद 45 हजार स्कूलों में खुले तारों की स्थिति पर निरीक्षण होगा।
रायपुर, छत्तीसगढ़।हाल ही में एक दर्दनाक घटना में स्कूल परिसर में करंट लगने से एक छात्र झुलस गया, जिसके बाद प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। इस हादसे को गंभीरता से लेते हुए अब राज्य सरकार ने प्रदेशभर के सभी 45,000 सरकारी और निजी स्कूलों में विद्युत सुरक्षा निरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। यह निरीक्षण अभियान आगामी सप्ताह से शुरू किया जाएगा और इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।
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हादसे की पृष्ठभूमि
बीते सप्ताह रायपुर के एक स्कूल में कक्षा 8वीं का छात्र स्कूल की बिल्डिंग के पास खेलते समय अचानक खुले तार की चपेट में आ गया। छात्र गंभीर रूप से झुलस गया और उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे के बाद छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। लोगों ने स्कूल प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल उठाए।
सरकार का तत्काल संज्ञान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग, विद्युत विभाग और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि स्कूलों की सभी विद्युत व्यवस्थाओं की जांच की जाए। विशेषकर पुराने भवनों, खुले तारों और असुरक्षित इलेक्ट्रिक पैनलों की तुरंत मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जाए।
45 हजार स्कूलों की होगी जांच
शिक्षा सचिव ने जानकारी दी कि पूरे प्रदेश में संचालित लगभग 45,000 स्कूलों की विद्युत स्थिति का फिजिकल ऑडिट कराया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर टीमें गठित की गई हैं, जिनमें इंजीनियर, शिक्षा विभाग के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के सदस्य शामिल होंगे। इन स्कूलों में विद्युत वायरिंग, फ्यूज, स्विचबोर्ड, ग्राउंडिंग और सुरक्षा उपकरणों की स्थिति का निरीक्षण होगा।
प्राथमिकता में आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में भवन पुराने हैं, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर जांचा जाएगा। यहां अधिकतर स्कूलों में विद्युत लाइनें खुले में बिछी होती हैं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
स्कूलों को भेजी गई गाइडलाइन
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने स्तर पर भी तुरंत बिजली से जुड़ी खामियों की सूची बनाएं और असुरक्षित क्षेत्रों को चिन्हित करें। स्कूलों से कहा गया है कि जब तक निरीक्षण पूरा नहीं हो जाता, तब तक विद्यार्थियों को खुले तारों या संदिग्ध इलेक्ट्रिक पैनलों के पास न जाने दिया जाए।
विशेषज्ञों की सलाह भी ली जाएगी
राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि इस निरीक्षण अभियान में विद्युत सुरक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी संस्थानों की सहायता ली जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भविष्य में कोई भी छात्र या स्टाफ सदस्य विद्युत संबंधी किसी हादसे का शिकार न हो।
राजनीति भी गरमाई
इस घटना को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्कूलों की मूलभूत संरचनाओं की उपेक्षा की है। यदि समय पर निरीक्षण होता तो ऐसी घटना नहीं घटती। वहीं, भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार ने त्वरित कार्रवाई कर इस मामले को प्राथमिकता दी है।
आगे की कार्ययोजना
- निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत कार्य के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा।
- विद्युत सेफ्टी को लेकर शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- जिन स्कूलों में गंभीर खामियां पाई जाएंगी, उन्हें अस्थायी रूप से बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
जनसहभागिता पर भी जोर
राज्य सरकार ने अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के स्कूलों की विद्युत व्यवस्था की निगरानी में प्रशासन का सहयोग करें। इसके अलावा, स्कूलों में “सेफ्टी ऑडिट सेल” बनाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
