छत्तीसगढ़ में एक पार्षद के चारपहिया वाहन से स्कूल जा रही मासूम बच्ची को टक्कर लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के से एक हृदय विदारक सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। यहां एक पार्षद द्वारा चलाई जा रही चारपहिया वाहन की चपेट में आकर स्कूल जा रही एक मासूम बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है, वहीं स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
हादसा सोमवार सुबह तब हुआ जब बच्ची रोज़ की तरह स्कूल जा रही थी। बताया जा रहा है कि पार्षद स्वयं गाड़ी चला रहा था और तेज रफ्तार के कारण वह बच्ची को देख नहीं सका।
हादसा कैसे हुआ?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतक बच्ची की उम्र लगभग 7 साल थी और वह कक्षा दो की छात्रा थी। प्रतिदिन की तरह वह अपने घर से पैदल स्कूल जा रही थी। इसी दौरान अचानक पीछे से आ रही पार्षद की कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पार्षद गाड़ी तेज रफ्तार में चला रहा था और अचानक सड़क पर मुड़ने के कारण उसका वाहन नियंत्रण से बाहर हो गया।
मौके पर ही मौत, लोगों ने की नारेबाजी
दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए और पार्षद के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
लोगों का आरोप है कि पार्षद हमेशा तेज रफ्तार में गाड़ी चलाता है और पूर्व में भी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर चुका है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस जांच में जुटी, पार्षद हिरासत में
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पार्षद को तत्काल हिरासत में लिया गया है और वाहन को जब्त कर लिया गया है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच की जा रही है कि हादसा कैसे हुआ, क्या पार्षद शराब या नशे की हालत में था, और क्या वाहन की गति सीमा पार थी।
बच्ची के माता-पिता सदमे में
इस दुखद घटना से बच्ची के माता-पिता गहरे सदमे में हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पिता घटना के बाद से बिल्कुल चुप हैं। यह बच्ची उनके दो बच्चों में सबसे छोटी थी।
परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पार्षद पर सख्त कार्रवाई की जाए और उसे राजनीतिक संरक्षण न मिले।
स्थानीय नेताओं की चुप्पी
हैरानी की बात यह रही कि घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी संबंधित पार्टी या नगर निगम के किसी भी वरिष्ठ नेता ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात नहीं की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आम नागरिक गलती करता है तो पुलिस तुरंत सख्त कार्रवाई करती है, लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि लापरवाही करता है तो उसे राजनीतिक संरक्षण मिल जाता है।
न्याय और मुआवजे की मांग
घटना के बाद लोगों ने सड़क पर चक्का जाम किया और पार्षद की तत्काल गिरफ्तारी व निष्कासन की मांग की। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और बच्ची के नाम पर सड़क सुरक्षा अभियान चलाने की मांग की गई।
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और लोगों को समझाकर शांत किया।
समाज में सवाल: जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही कितनी?
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जनप्रतिनिधि ही नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम नागरिक कैसे जागरूक होंगे।
पार्षद जैसे पदों पर बैठे लोगों से समाज को आदर्श और जिम्मेदारी की उम्मीद होती है, लेकिन जब वही लोग लापरवाही करते हैं तो उसका खामियाजा मासूमों को भुगतना पड़ता है।
निष्कर्ष
इस दर्दनाक हादसे ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली और एक परिवार को असमय शोक में डाल दिया।
अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन कितनी निष्पक्षता से जांच करते हैं और क्या वास्तव में दोषी को सज़ा मिलती है या यह मामला भी राजनीतिक रसूख के कारण ठंडे बस्ते में चला जाएगा।





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