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ओरल कैंसर के खिलाफ MP की बड़ी पहल: भोपाल का GMC बनेगा नोडल सेंटर, 51 जिलों के डॉक्टरों को मिलेगी ट्रेनिंग

मध्य प्रदेश ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 12 March 2026

सर षण ओरल

भोपाल 

प्रदेश भर के जिला अस्पतालों में पदस्थ दंत चिकित्सकों (डेंटिस्ट) और चिकित्सा अधिकारियों में मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान के लिए उनकी तकनीकी समझ बढ़ाई जाएगी।

इसके लिए भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे प्रदेश भर में मुंह के कैंसर की रोकथाम के लिए नोडल ट्रेनिंग सेंटर की भूमिका दी है।
शुरुआती लक्षणों की पहचान और विशेषज्ञों का प्रशिक्षण

अक्सर देखा गया है कि ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को सामान्य संक्रमण या छाला समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस देरी के कारण मरीज तब अस्पताल पहुंचता है जब बीमारी एडवांस चरण (थर्ड या फोर्थ स्टेज) में होती है।

जीएमसी में होने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान डेंटल और ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डेंटिस्ट और चिकित्सा अधिकारियों को सिखाएंगे कि कैसे मुंह के अंदर होने वाले सफेद दाग (ल्यूकोप्लाकिया), लाल चकत्ते या लंबे समय से न भरने वाले छालों को देखकर कैंसर की आशंका का सटीक पता लगाया जाए।

मृत्यु दर में कमी और मास्टर ट्रेनर मॉडल

अधिकारियों का कहना है कि इस मुहिम से न केवल प्रदेश में ओरल कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि बड़े अस्पतालों पर बढ़ने वाला मरीजों का अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। यह प्रशिक्षण 'ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स' मॉडल पर आधारित होगा, यानी यहाँ से सीखकर जाने वाले डॉक्टर अपने जिले के अन्य छोटे केंद्रों के स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे।

रेफरल सिस्टम होगा मजबूत

एक बार जब जिलों में पदस्थ डॉक्टर इस स्क्रीनिंग में माहिर हो जाएंगे, तो वे संदिग्ध मरीजों को तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर सकेंगे। इससे मरीजों का समय बचेगा और इलाज की सफलता की दर बढ़ेगी।
कैंसर के इन शुरुआती लक्षणों पर रहेगी नजर

  • सफेद या लाल धब्बे – मुंह के अंदर ऐसे पैच जो रगड़ने पर भी न हटें।
  • असामान्य गांठ – मसूड़ों या गालों के अंदर की तरफ गांठ का महसूस होना।
  • पुराने छाले – ऐसे छाले जो दो सप्ताह से अधिक समय तक दवा के बाद भी ठीक न हों।
  • जबड़े में जकड़न – मुंह खोलने में परेशानी होना या निगलते समय दर्द होना।

विभागाध्यक्ष का वक्तव्य

प्रदेश के 51 जिलों के दंत चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य ओरल कैंसर के शीघ्र निदान पर है। यदि शुरुआती चरण में ही कैंसर के लक्षणों की पहचान हो जाए, तो मरीज की जान बचाना काफी आसान हो जाता है। – डॉ. अनुज भार्गव, विभागाध्यक्ष, डेंटल सर्जरी विभाग, जीएमसी भोपाल

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